Electronics Relay क्या है और इसका use किस काम में होता है?

what is electronics relay and what do this work

नमस्कार दोस्तों, आपने हमारे पिछले पोस्ट में ट्रांसफार्मर और उसके कामों के बारे में जाना था। आज मैं आपको बताने जा रहा हूँ कि इलेक्ट्रॉनिक्स Relay (रिले) क्या है और इसका क्या काम है? ये किस तरह से काम करता है और इसके  इस्तेमाल कहाँ-कहाँ पर किये जाते हैं?

💥 Electronics Relay (इलेक्ट्रॉनिक्स रिले) क्या है?

💨 Relay इलेक्ट्रॉनिक्स में इस्तेमाल किया जाने वाला एक ऐसा यन्त्र है जो निर्धारित Power Supply यानि कि निर्धारित वोल्ट का सप्लाई मिलने पर अपने से होकर गुजरने वाले कनेक्शन की दिशा को बदल देता है। कहने का तात्पर्य ये कि जब भी किसी रिले के इनपुट वाले पॉइंट्स पर उचित सप्लाई दिए जाते हैं तब वो on स्थिति में आ जाता है और जो परिपथ उसके एक प्वाइंट से होकर दूसरे के साथ जुड़ा हुआ होता है उस परिपथ को वो उस दूसरे पॉइंट से हटाकर अपने तीसरे प्वाइंट के साथ जोड़ देता है जिससे कि कनेक्शन का दिशा बदल जाता है और करंट दूसरे पथ पर चलने लगता है। ज्यादा विस्तार से समझने के लिए नीचे वाले इमेज को देख सकते हैं। 

what is electronics relay and what do this work

दोस्तों, ऊपर वाले चित्र में मैंने समझाने की कोशिश की है कि किस तरह से जब रिले में उचित सप्लाई दी जाती हैं तब उसके कॉमन वाले प्वाइंट का सप्लाई दूसरे पथ से उठकर तीसरे पथ में चला जाता है। यदि सीधे शब्दों में कहें तो relay एक ऐसा automatic switch है जो उचित सप्लाई मिलने के बाद काम करता है।



💥 Relay का प्रयोग किन-किन electronics उपकरणों में किया जाता है?

💨 दोस्तों, अधिकांश ऑटोमेटिक उपकरणों में इस यन्त्र का इस्तेमाल किये जाते हैं। इसके इस्तेमाल वाले उपकरण के अच्छे उदाहरण Stabilizer (स्टेबलाइजर), UPS, Inverter (इन्वर्टर), इत्यादि हैं क्योंकि इनमें बड़े मात्रा में रिले का इस्तेमाल देखे जा सकते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये सारे उपकरण ऑटोमेटिक होते हैं और खुद ही उचित काम करने के लिए अपने परिपथ को समय-समय पर बदलते रहते हैं जो कि रिले की सहायता से ही संभव हो पाते हैं।

यहाँ गौर करने वाली बात ये कि मैंने कहा है कि रिले लगभग हर ऑटोमैटिक उपकरण में उपयोग होता है, जिसका मतलब ये है कि कुछ ऐसे भी ऑटोमैटिक उपकरण हो सकते हैं जिनमें इसका उपयोग नहीं होता है। इसके सबसे अच्छे उदाहरण आप एक आटोमेटिक आयरन का ले सकते हैं। आयरन के ऑटोमैटिक पार्ट में रिले का इस्तेमाल नहीं किये जाते।

उसमें लोहे की ही कुछ पत्तियों को कुछ इस तरह से सेट किये होते हैं कि जब भी आयरन पहले से सेट किये हुए इतना गर्म हो जाए तब उसके क्वाइल का कनेक्शन खुद ही सप्लाई से कट जाए और आयरन हीट होना बंद हो जाए। तो फिलहाल आयरन के बारे में इतनी जानकारी काफी है, समय आने पर हम अपने अगले किसी पोस्ट में इसके बारे में भी विस्तार से अवश्य बताएँगे, लेकिन फिलहाल अब हम अपने पोस्ट पर चलते हैं।



💥 Relay में कितने पार्ट्स लगे होते हैं और उनके काम क्या हैं?

💨 दोस्तों, यदि रिले की बनावट को छोड़कर सिर्फ उसके workable पार्ट्स की बात करें तो किसी भी तरह की रिले में सिर्फ 3 ही पार्ट्स होते हैं। तो चलिए विस्तार से जानें उन पार्ट्स के बारे में.....

1 ⊳ क्वाइल ⇢ किसी भी रिले का महत्त्व वास्तव में सिर्फ उसके क्वाइल से ही होता है। सारा काम सिर्फ क्वाइल ही करता है। रिले के 2 पॉइंट्स पर इस क्वाइल के एक-एक सिरे को connect किये जाते हैं और जब उस पॉइंट्स पर उचित workable वोल्टस की सप्लाई दी जाए तब क्वाईल के चारों तरफ एक चुम्बकीय शील्ड पैदा हो जाती है जिस वजह से इसके कॉमन पॉइंट से जुड़ा हुआ दोलन उस क्वाईल और उसके कोर की ओर आकर्षित होकर उसमें चिपक जाता है। ऐसा होते ही वो कॉमन वाला पॉइंट जो कि रिले की एक पॉइंट से जुड़ा रहता है, वहां से हटकर खुद ही उसके एक दूसरे प्वाईंट से जुड जाता है। 

2 ⊳ कोर ⇢ रिले का क्वाईल गोल और बेलनाकार लोहे की एक ठोस कोर पर लपेटा जाता है जिससे कि क्वाईल जलने से बचता है और सप्लाई मिलने पर वहां एक मजबूत चुम्बकीय क्षेत्र बनता है ताकि जब क्वाइल को पावर दिया जाए तो ये अच्छी तरह से दोलन को अपनी ओर खींच सके। 

3 ⊳ दोलन ⇢ दोलन का 2 छोर होता है। एक छोर रिले के कॉमन वाले प्वाइंट के साथ फिक्स कर दिया जाता है जिससे कि किसी भी हालत में वो उससे जुड़ा हुआ ही रहे। इसका दूसरा छोर इस तरह से लगा हुआ होता है कि जब रिले को सप्लाई नहीं मिले तो वो बाकी की एक पॉइंट के साथ जुड़ा रहे और जब रिले को सप्लाई मिल जाता है तब क्वाइल से उत्पन्न चुम्बकीय फील्ड इसे अपनी ओर खींच लेता है जिससे कि ये दोलन रिले की दूसरे पॉइंट के साथ जुड़ जाता है। और ऐसा होते ही कॉमन पॉइंट वाला कनेक्शन का पथ बदल जाता है। 

💥 Relay में कितने वोल्टस का सप्लाई दिया जाता है?

💨 दोस्तों, सबसे जरूरी बात ये जान लेना भी है कि आखिर रिले में सप्लाई दिया कितने वोल्टस का जाता है? तो दोस्तों, ये बात आपको तय करना होता है कि आपको कितने वोल्ट सप्लाई पर काम करने वाला रिले चाहिए? आमतौर पर मार्केट में 12 वोल्ट वाले रिले कम-से-कम आते हैं। तो दोस्तों, यदि आप अपना कोई प्रोजेक्ट तैयार कर रहे हैं तो आप अपने जरूरत के अनुसार वोल्टस का चुनाव कर सकते हैं। लेकिन यदि बात करें किसी सर्किट में पहले से लगे हुए रिले की, तो आपको बता देना चाहूँगा कि किसी भी रिले पर उसके सारे डिटेल्स दिए हुए रहते हैं। बस उसे समझने के लिए आपके पास थोड़ा-सा अनुभव होना चाहिए। ज्यादातर सर्किट्स में 12 वोल्ट के रिले इस्तेमाल किये जाते हैं। रिले के ऊपर ही आपको इसका वोल्ट लिखा हुआ मिल जायेगा। 



💥 Relay कितने प्रकार के होते हैं?

💨 दोस्तों, बनावट के आधार पर रिले विभिन्न तरह के हो सकते हैं। बहुत सारे सर्किट्स में उसके काम और फिटिंग के आधार पर रिले तैयार किये जाते हैं। इसलिए इसका आकार और बनावट कोई मायने नहीं रखता है। साधारण रूप में Relay आधार पर बनाये जाते हैं।

1 ⊳ पासिंग करेंट ⇢ रिले से होकर कितने एम्पियर की करेंट को पास किया जायेगा, इस आधार पर ये विभिन्न एम्पियर में बनाया जाता है। जितना ज्यादा एम्पियर होगा उतना ही बड़ा रिले का साइज भी होगा।

2 ⊳ Two - Way ⇢ एक रिले से एक बार में 2 कनेक्शन के पथ को भी बदला जा सकता है, ऐसे को 2-वे रिले कहा जाता है।

  किसी भी सर्किट्स में काम और फिटिंग के आधार पर इससे भी अलग तरह के Relay इस्तेमाल में देखे जा सकते हैं।



👎 तो दोस्तों, आज का मेरा ये पोस्ट आपको कैसा लगा हमें जरूर बताएं और यदि आपका कोई सवाल हो तो आप पूछ सकते हैं। धन्यवाद.....





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