Stabilizer क्या है और इसे खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

👤 Stabilizer ( स्टेबलाईजर ) क्या है और ये किस काम आता है ?

आजकल सभी घरों में पंखे, LCD, DTH इत्यादि के इस्तेमाल आम बात हो गए हैं। लेकिन सामान्य तौर पर हमारे घरों में इतने कम voltage होते हैं कि उतने में इन्हें चला पाना मुश्किल होता है और यदि किसी तरह ये चल भी जाए तो इसके खराब होने की आशंका भी बहुत हो जाती है। वहीँ कहीं-कहीं तो जरूरत से इतने ज्यादा voltage हैं कि ये सभी उपकरण महीनेभर में ही जल जाते हैं। लेकिन जब कुछ रूपये के खर्च में ही आपके इस समस्या का समाधान मौजूद हो तो फिर रिस्क लेने की भला जरूरत ही क्या है? शायद ही किसी को ये बात पता न हो कि इस समस्या के समाधान के लिए already एक electronic उपकरण की खोज की जा चुकी है जिसका नाम है स्टेबलाईजर।


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जी हाँ, यदि आप भी अपने घरों में बेतरतीब वोल्टेज की समस्या से परेशान हैं तो ये उपकरण आपके लिए ही बनाये गए हैं। इस स्टेबलाईजर की सबसे बड़ी विशेषता ये होती है कि यदि आपके घरों में कम वोल्टेज की समस्या है तो ये उसे 2 गुना तक बढ़ा सकता है और यदि आप ओवरलोड voltage की समस्या से परेशान हैं तो ये उसे भी आधा तक कर सकता है। आमतौर पर सारे स्टेबलाईजरों में ये खासियत होती है। इसकी help से आपके सभी उपकरण सुरक्षित रहते हैं और लम्बे समय तक अच्छे से अपना काम करते रहते।

👤 इस्तेमाल के आधार पर Stabilizer कितने तरह का आता है ?

हमारे घरों के वोल्टेज कभी भी एक समान नहीं रहते हैं और इसमें हमेशा ही उतार-चढ़ाव आते रहता है। तो ऐसे में जाहिर सी बात है कि इस स्थिति में स्टेबलाईजर के output voltage में भी हमारे घरों के voltage के अनुपात में ही उतार-चढ़ाव आएगा। तो सामान्यतः ऐसा भी हो जाता है कि कभी हमारे घरों में कम वोल्टेज रहता है और उस समय हम स्टेबलाईजर को इस तरह से adjust किये हुए होते हैं कि वो हमें 220 वोल्ट AC output के रूप में देता है लेकिन ज्योंहि घरों के voltage में वृद्धि होती है ठीक तभी इसका output voltage भी बढ़ जाता है और 220 V से ज्यादा हो जाता है।

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तो ऐसे में हमारे उपकरण को जरूरत से ज्यादा supply मिलने लग जाते हैं जिस वजह से उसके जलने की संभावना बढ़ जाती है। तो हमारे इन्हीं समस्या को देखते हुए स्टेबलाईजर में output voltage को कम-ज्यादा करने का भी विकल्प दिया हुआ होता है और हमारे इसी जरूरत के आधार पर स्टेबलाईजर भी निम्नलिखित 2 तरह के बनाये जाते हैं।

1) Manually stabilizer - ये स्टेबलाईजर मार्केट में सबसे कम price में मिलता है। जब कभी भी हमारे घर के voltage में बढ़ोत्तरी होती है और इस stabilizer के output से overload वोल्टेज आने लगती है और तब इस स्थिति में इसके output से suppy मिलना खुद ही बंद हो जाता है और stabilizer में लगा हुआ लाल led जल उठता है जिससे ये पता चलता है कि stabilizer में auto-cut हो गया है। और फिर auto-cut का पता चलते ही हमें stabilizer के rottery switch के नोब को घुमाकर voltage को कम करना पड़ता है तब जाकर इसके output से suppy मिलता है। चूंकि इसके output voltage को हमें खुद ही control करना होता है इसलिए इसे manually stabilizer कहा जाता है।

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2) Automatic stabilizer - जब कभी हमारे घरों में एकाएक से ज्यादा supply आ जाती है तो ऐसे में Stabilizer के output से भी ज्यादा suppy मिलने लगता है। लेकिन इस stabilizer में ऐसी कोई बात नहीं होती। इसके अन्दर लगा automatic किट की setting कुछ इस तरह से कर दी जाती है कि ये हमेशा output voltage को पहले से तय किये हुए जितना के लगभग ही रखता है। आमतौर पर किसी भी नए automatic stabilizer में output voltage को 200 volt पर सेट किया जाता है जिसे आप अपनी जरूरत के अनुसार कम या ज्यादा भी करा सकते हैं। चूंकि ये stabilizer खुद ही voltage को maintain करता है इसलिए इसे automatic stabilizer कहा जाता है। हालांकि ये स्टेबलाईजर manually stabilizer से थोड़ा-सा costly आता है लेकिन इसका इस्तेमाल उसके तुलना में बहुत ही आरामदायक होता है।

👤 गुणवत्ता के आधार पर stabilizer कितने तरह का होता है ?

जब भी हम कोई सामान खरीदते हैं तो इस बात का ध्यान जरूर रखते हैं कि वो सामान उच्च गुणवत्ता वाला हो और ज्यादा समय तक चल सके। तो ठीक इसी तरह से जब भी आप कोई भी stabilizer खरीदने जाएँ तो इस बात का ध्यान रखें कि उसमें इस्तेमाल किये गए सामान ठोस और टिकाऊ हो। इसके बाद जब भी आप ये सुनिश्चित हो जाएँ कि उसके सारे componants सही हैं तो भी आपको एक सबसे बड़ी बात का ध्यान रखना होगा।

दरअसल stabilizer का सारा काम उसमें इस्तेमाल किये गए transformer पर ही निर्भर रहते हैं। यदि ट्रांसफार्मर उच्च क्वालिटी के सामानों से न बना हो तो उस stabilizer की कोई गारंटी नहीं कि वो कब खराब हो जाए। आमतौर पर किसी भी transformer की गुणवत्ता उसमें इस्तेमाल किये गए कोर और क्वाईल पर ज्यादातर निर्भर करता है। कोर तो किसी हद तक सही है, लेकिन यदि उसमें low quality के coil का इस्तेमाल किया जाए तो वो जल्द ही खराब हो सकता है। आमतौर पर एल्युमीनियम के coil को low quality का माना जाता है और copper यानि तांबा के coil को transformer के लिए सही माना जाता है। 

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इसलिए जब भी मार्केट से कोई भी stabilizer खरीदने जाएँ तो इस बात को जरूर सुनिश्चित कर लें कि उसके transformer में copper के coil का इस्तेमाल किया गया हो। हालांकि aluminium के अपेक्षा copper coil के transformer वाला stabilizer जरा-सा महंगा जरूर होता है लेकिन गुणवत्ता में ये उसके मुकाबले लाख गुना अच्छा होता है।

👤 Stabilizer पर अधिकतम कितना लोड दिया जा सकता है ?

जिस तरह से किसी भी इंसान और मशीन के काम करने की एक क्षमता होती है ठीक उसी तरह से एक stabilizer के काम करने की भी एक क्षमता होती है। आप कितने उपकरण को stabilizer पर इस्तेमाल करना चाहते हैं उस हिसाब से calculate करके आपको stabilizerखरीदना पड़ता है। Example के लिए मान लीजिये कि यदि आप सिर्फ एक lcd, fan और एक dth के लिए stabilizer खरीदना चाहते हैं तो इसके लिए सबसे पहले इन तीनों उपकरणों के watts को calculate कीजिये।

आमतौर पर तीनों उपकरण अलग-अलग लगभग 65 watt के होते हैं तो इस तरह से उन तीनों को मिलाकर हो जाता है 195 watts. तो अब चूंकि आपको सिर्फ 195 watts के उपकरण के लिए ही stabilizer खरीदना है तो इसलिए आप मार्केट से 200 watt का एक रेडीमेड staibilizer ले सकते हैं। वैसे भी इससे कम वाट का stabilizer मार्केट में मिलता भी नहीं है जिस वजह से कम uses रहने पर भी आपको इतने watts का खरीदना ही पड़ेगा। यदि आपको लगता है कि आने वाले कुछ समय के बाद आप इसपर और भी कुछ उपकरण इस्तेमाल कर सकते हैं तो उस आधार से आप 300 watt या फिर इससे भी ज्यादा watts के stabilizer खरीद सकते हैं।

सावधानी :- एक बात का हमेशा ध्यान रहे कि इन छोटे-मोटे stabilizer पर कभी भी press iron का इस्तेमाल न करें। सामान्य तौर पर अब automatic iron का इस्तेमाल किया जाता है जो 500 से 1000 watts तक का होता है। ऐसे में यदि आप इसे 200 या 300 watts जैसे छोटे stabilizer से जोड़ देंगे तो आपका stabilizer पलभर में ही जलकर खराब और बेकार हो जायेगा। इसलिए यदि आप press iron के लिए stabilizer खरीदना चाहते हैं तो कम-से-कम 1000 watts यानी 1 KV का ही खरीदें।

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